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मालवीय नगर अग्निकांड: घायल लोगों में से 19 की हालत गंभीर, 21 लोगों की मौत कैसे हुई? वजह अब तक पता नहीं

 Edited By: Kajal Kumari @lallkajal
 Published : Jun 04, 2026 08:34 am IST,  Updated : Jun 04, 2026 08:34 am IST

दिल्ली के मालवीय नगर में हुए अग्निकांड मामले में घायल 19 लोगों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। 21 लोगों की मौत कैसे हुई, इसकी वजह पता नहीं चली है। आग जिस बिल्डिंग में लगी वो कहां थी, कैसी व्यवस्था थी? जानें सबकुछ...

मालवीय नगर अग्निकांड- India TV Hindi
मालवीय नगर अग्निकांड Image Source : PTI

दिल्ली: मालवीय नगर के 'फ्लोरिश स्टे' बेड-एंड-ब्रेकफास्ट होटल (Florish stay bed and breakfast hotel) में बुधवार को आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 11 विदेशी नागरिक भी शामिल थे। आग लगने का कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है, और कई एजेंसियां ​​इस घटना की जांच कर रही हैं। इस घटना के बाद, दिल्ली नगर निगम (MCD) गुरुवार से दक्षिण जोन में बनी अवैध व्यावसायिक इमारतों को सील करना शुरू करेगा। आग में घायल हुए 35 लोगों में से 19 की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है।

कहां बनी थी इमारत, कैसी थी व्यवस्था

अधिकारियों के मुताबिक, दक्षिणी दिल्ली में जिस इमारत में ये जानलेवा आग लगी, वो 'लाल डोरा' गांव के इलाके में स्थित थी। इसे शुरू में 1980 के दशक में बनाया गया था और बाद में 2012-13 में इसका दोबारा निर्माण किया गया। ये होटल मुख्य रूप से पास के अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को ठहरने की सुविधा देता था।  चूंकि इस इलाके में विदेशी नागरिक अक्सर आते-जाते रहते हैं और इस कार्रवाई से यात्रियों में घबराहट फैल सकती है, इसलिए निगम गुरुवार से ये अभियान शुरू करेगा।

एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, कल से, एमसीडी दक्षिण-जोन में बिना अनुमति वाली व्यावसायिक जगहों को सील करना शुरू कर देगा। अधिकारियों ने बताया कि बीएंडबी सुविधा ने कई नियमों का उल्लंघन किया था। एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "बेड-एंड-ब्रेकफास्ट सुविधा चलाने की अनुमति सिर्फ छह कमरों के लिए दी गई थी, लेकिन उस जगह पर 25 कमरे चल रहे थे। इसे 2012-13 के आस-पास दोबारा बनाया गया था और इसके पास न तो कोई स्वीकृत बिल्डिंग प्लान था और न ही कोई मंजूर लेआउट।"  ये इमारत हौज रानी गांव में स्थित थी और इसका इस्तेमाल व्यावसायिक कामों के लिए किया जा रहा था, क्योंकि ये एक व्यावसायिक सड़क पर बनी हुई थी।

सीलिंग की कार्रवाई शुरू की जाएगी

अधिकारी ने कहा, "ये इमारत 'लाल डोरा' इलाके में आती है, जहां आमतौर पर बिल्डिंग के मंजूर प्लान उपलब्ध नहीं होते। इस प्रॉपर्टी का इस्तेमाल एक रिहायशी इलाके में कमर्शियल तौर पर किया जा रहा था।" उन्होंने बताया कि इलाके का सर्वे शुरू कर दिया गया है और नियमों का उल्लंघन करके चल रहे दूसरे व्यावसायिक संस्थानों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "इस इलाके में नियमों का उल्लंघन करते हुए पाए जाने वाली सभी व्यावसायिक संपत्तियों को अगले 48 घंटों के अंदर सील कर दिया जाएगा।" 'लाल डोरा' जमीन के एक ऐतिहासिक वर्गीकरण को दर्शाता है, जो गांव के रिहायशी इलाकों की सीमा तय करता है। ऐतिहासिक रूप से, इन इलाकों में मौजूद संपत्तियों को एमसीडी की भवन नियमावली और मंजूरी से छूट मिली हुई है, जिससे बिना किसी औपचारिक रूप से मंजूर प्लान के भी निर्माण कार्य किया जा सकता था।

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